ग्वार बिजाई का अब उपयुक्त समय चल रहा है: डा. बी.डी. यादव

सिरसा। ग्वार बारानी क्षेत्रों की एक महत्त्वपूर्ण फसल है, जो कम खर्च करके अधिक आमदनी देती है तथा इसके साथ-साथ यह भूमि की उपजाऊ शक्ति में भी सुधार लाती है, जो आगामी सरसों व गेहूं की फसल के लिए बहुत फायदेमंद है तथा इन फसलों में 25 से 30 प्रतिशत नत्रजन की बचत करती है। डॉ. बी.डी. यादव ग्वार विशेषज्ञ ने बताया कि ग्वार की बिजाई के लिए जून माह का दूसरा पखवाड़ा सबसे उपयुक्त है और ग्वार की बिजाई के लिए अब सही समय चल रहा है। जिस किसान के पास नहर का पानी उपलब्ध था वह अपने खेतों में जून के पहले पखवाड़े में पानी लगाकर कुछ बिजाई कर चुके हैं, परन्तु रानियां खण्ड के कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां ग्वार की बिजाई अभी रह रही है और वह बारिश का इंतजार कर रहे हैं। अब जब भी प्री-मानसून/मानसून की बारिश आने पर बची हुई बिजाई इस महीने के आखिर तक पूरी कर लें। बिजाई के लिए किसानों को ग्वार की उन्नत किस्में एचजी 365 व एचजी 2-20 का प्रमाणित बीज प्रयोग करने की सलाह दी। ग्वार फसल में जडग़लन रोग एक मुख्य बीमारी है, जो पैदावार को 20-45 प्रतिशत तक प्रभावित करती है, जो जमीन की किस्म पर निर्भर करता है। इस बीमारी के जीवाणु जमीन में पनपते हैं। इसकी रोकथाम के लिए 3 ग्राम कार्बान्डाजिम 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रति किलो बीज की दर से सुखा उपचारित करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जडग़लन रोग का इलाज मात्र 15 रूपये के बीज उपचार से संभव है। इस बीमारी के रोकथाम में बीज उपचार ही एक मात्र समाधान है। उन्होंने ने किसानों को बताया कि जडग़लन रोग के लिए सुखा बीज उपचार करना फायदेमंद, सस्ता व सरल उपाय है, जिसको गरीब से गरीब किसान भी कर सकता है। खाद की मात्रा पर बोलते हुए डॉ. यादव ने कहा कि बिजाई के समय 100 किलो सुपर फास्फेट तथा 15 किलो यूरिया या 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ के़ हिसाब से ड्रिल करें। इस प्रोग्राम को आगे बढ़ाते हुए डॉ. यादव ने बुआई के लिए किस्म एचजी 2-20 का 3 किलो बीज तथा एचजी 365 ग्वार की किस्म के लिए 4 किलो बीज प्रति एकड़ से प्रयोग करें।
खरपतवारनाशक दवा का अनावश्यक प्रयोग न करें:
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि ग्वार की खड़ी फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के रोकथाम के किसी भी अनावश्यक खरपतवार नाशक दवा का प्रयोग न करें इसका दुष्प्रभाव आगामी सरसों के फसल के जमाव, बढ़वार तथा पैदावार पर पड़ता है। उन्होंने किसानों को आगाह किया कि ट्यूबवैल का खारी व तेलिया (सोडिक) पानी का बिजाई के लिए तथा बाद में खड़ी फसल में कदापि इस्तेमाल न करें, इससे जमीन का मुंंह बन्द हो जाता है तथा पौधे की बढ़वार रूक जाती है और पौधों के पत्ते पीले होकर गिरने लग जाते हैं, जिससे ग्वार की पैदावार काफी कम मिलती है। यह शिविर सेवानिवृत शस्य वैज्ञानिक डॉ. जगदेव सिंह के तत्वावधान में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव के साथ मिलकर ग्वार की आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सिरसा जिले के गांव खाजाखेड़ा में आयोजित किया गया, ताकि किसान समय पर ग्वार की बिजाई करके अधिक पैदावार ले सकें। डॉ. जगदेव सिंह ने किसानों को अपने खेत की मिट्टी की जांच करवा कर ही बिजाई करने की सलाह दी। इसके साथ-साथ उन्होंने अपने खेतों में बिजाई के समय गोबर की तैयार खाद डालने पर विशेष जोर दिया और किसानों से आहा्रन किया कि किसान कृषि वैज्ञानिक व अधिकारी के संपर्क में रहें, जिससे उन्हें आधुनिक तकनीक की जानकारी मिलती रहें।
प्रश्नोत्तरी सभा का आयोजन:
इस अवसर पर प्रश्नोतरी सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पांच किसानों को प्रश्न पूछने पर सही जबाव देने पर इनाम भी दिये गए। इस शिविर को सफल बनाने में गांव के सरपंच रविकुमार व प्रगतिशील किसान चंद्रभान का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर ज्ञानचंद, ओमप्रकाश, धर्मपाल, शीशपाल, रमेश कुमार,  राधेश्याम, साहबराम व वजीरसिंह आदि किसान मौजूद थे। इस शिविर में 65 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन दवाई, एक मास्क तथा एक जोड़ी दस्ताने हिन्दुस्तान गम् एण्ड कैमिकल्स भिवानी की तरफ  से मुफ्त दिए गए।

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