समाधान शिविर में आई 16 शिकायतें, समाधान के दिए निर्देश

हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार वीरवार को स्थानीय लघु सचिवालय के सभागार में समाधान शिविर का आयोजन किया गया। इसके अलावा उपमंडल डबवाली, कालांवाली व ऐलनाबाद में भी समाधान शिविर लगाए गए। वीरवार को जिले में आयोजित समाधान शिविरों में कुल 16 शिकायतें आई। सिरसा में जिला परिषद के सीईओ डा. सुभाष चंद्र ने जन शिकायतें सुनी और उपस्थित विभागों के अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए।
सीईओ डा. सुभाष चंद्र ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी समस्या में ढिलाई न बरती जाए और त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार सोमवार व वीरवार को जिला व उपमंडल स्तर पर समाधान शिविर का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में वीरवार को जन समस्याएं सुनी गई और जल्द समाधान के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए। उन्होंने बताया कि जिला व उपमंडल स्तर पर सप्ताह में दो दिन सोमवार व वीरवार को सुबह दस से 12 बजे तक समाधान शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिसमें नागरिक अपनी समस्या को प्रशासन के समक्ष रख सकता है। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
स्वच्छता के साथ-साथ जागरूकता गतिविधियों का किया जा रहा आयोजन
– कपड़े व जूट के थैलों का प्रयोग करें नागरिक: एडीसी वीरेंद्र सहरावत
जिला में नगर परिषदों व नगर पालिकाओं द्वारा हरियाणा शहरी स्वच्छता अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। टीमें निरंतर स्वच्छता के साथ-साथ जागरूकता गतिविधियों का भी आयोजन कर रही है। टीमों द्वारा आमजन, दुकानदार, स्ट्रीट वेंडर को स्वच्छता का ध्यान रखने, डस्टबिन का उपयोग करने व प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग न करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही नियमित तौर पर डोर टू डोर कूड़ा उठान का कार्य भी किया जा रहा है।
अतिरिक्त उपायुक्त एवं जिला नगर आयुक्त वीरेंद्र सहरावत ने कहा कि स्वच्छता न केवल हमारे परिवेश की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से भी सीधा संबंध रखती है। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि वे अपने घर, गली, मोहल्ले और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने में भूमिका निभाएं तथा प्लास्टिक और कचरे के उचित निस्तारण पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि कूड़ा नगर परिषद व नगर पालिकाओं की गाडिय़ों में ही डालें। पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें तथा प्रतिबंधित प्लास्टिक की बजाय कपड़े व जूट के थैलों का प्रयोग करें।

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