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भारत का स्मार्टफोन बाजार बड़ी गिरावट की ओर: कपिल अनेजा

कीमतों में भारी उछाल, सरकार और ब्रांड दोनों को ध्यान देना जरूरी
सिरसा। एआईएमआरए हरियाणा के अनुसार भारत का स्मार्टफोन मार्केट पिछले कई वर्षों की तेज वृद्धि और चमक-दमक के बाद अब तक की सबसे बड़ी गिरावट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पुराने चिपसेट से नए अक आधारित चिपसेट की ओर बदलाव, इन चिपसेट्स की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में लगातार आ रही कमी के कारण स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन रहा है। आॅल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन  हरियाणा के प्रांतीय महासचिव कपिल अनेजा ने कहा कि साल 2026 में भारत का स्मार्टफोन बाजार ग्लोबल सप्लाई की कमी, रुपये में उतार-चढ़ाव और कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत के कारण गंभीर उथल-पुथल का सामना कर रहा है। यदि अनुमान सही साबित होते हैं, तो 2026 में हाल के वर्षों की सबसे तेज सालाना गिरावट दर्ज की जा सकती है— जो 2022 से भी अधिक हो सकती है। गौरतलब है कि 2022 में स्मार्टफोन शिपमेंट साल-दर-साल लगभग 10 प्रतिशत घटकर 144 मिलियन यूनिट रह गया था, जो 2019 के बाद सबसे निचला स्तर था। इसका मुख्य कारण कमजोर कंज्यूमर डिमांड और बढ़ती महंगाई रही। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत का स्मार्टफोन बाजार सप्लाई की कमी और मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियों के परफेक्ट स्टॉर्म से जूझ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सप्लाई की कमी 2027 के पहले छह महीनों तक कम होने की संभावना नहीं है, हालांकि उसके बाद बाजार में धीरे-धीरे रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है।
अनेजा ने यह भी कहा कि भारतीय पारंपरिक मेनलाइन रिटेल मार्केट इतनी लंबी और कठिन लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। ऐसे में सभी मोबाइल ब्रांड्स को केवल आॅनलाइन व्यापार से मिलने वाले अल्पकालिक फायदों पर ध्यान देने के बजाय भारतीय पारंपरिक मेनलाइन व्यापार के साथ संतुलित और अनुकूल व्यापारिक नीतियां बनानी चाहिए, ताकि बाजार में लंबे समय तक स्वस्थ और स्थिर व्यापार संभव हो सके।
साथ ही उन्होंने भारत सरकार से भी आग्रह किया कि आॅनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए स्पष्ट और संतुलित नीतियां बनाई जाएं, जिससे भारतीय पारंपरिक व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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