डा. इंद्र गोयल की 9 दिवसीय मौन साधना पूर्ण

सिरसा। अखिल भारतीय सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. इंद्र गोयल द्वारा 30 मई 2026 से 7 जून 2026 तक 9 दिवसीय मौन साधना आज प्रात: सम्पन्न हुई। इस अवसर पर मन कृतज्ञता, शांति और संतोष से भरा हुआ है। डा. इंद्र गोयल ने कहा कि मेरे जीवन में मौन साधना कोई नई बात नहीं है। वर्ष 1995 में मैंने 7 दिनों तक मौन रहकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया था। उसके बाद वर्ष 2016 में 21 दिवसीय मौन यात्रा का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वर्ष 2025 में 40 दिवसीय मौन साधना का गहन अनुभव मिला। इसी वर्ष जनवरी 2026 में 9 दिवसीय मौन साधना सम्पन्न की और अब 30 मई से 7 जून 2026 तक की यह 9 दिवसीय मौन साधना भी परमात्मा की कृपा से पूर्ण हुई। उन्होंने कहा कि हर बार मौन ने मुझे कुछ नया सिखाया है। मौन में मन की चंचलता धीरे-धीरे शांत होती है, विचारों का कोलाहल कम होता है और आत्मा की सूक्ष्म आवाज सुनाई देने लगती है। इस बार की साधना मेरे लिए विशेष रूप से अद्भुत रही क्योंकि इसमें ध्यान, स्वाध्याय, पूजा-अर्चना और सेवा कार्यों का सुंदर समन्वय रहा। इन नौ दिनों में मुझे यह अनुभव हुआ कि मौन केवल वाणी का विराम नहीं है, बल्कि स्वयं से मिलने की एक पवित्र यात्रा है। जब हम बाहरी शोर से दूर होते हैं, तब भीतर का प्रकाश अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगता है। इस अवधि में मुझे आत्मचिंतन, आत्मनिरीक्षण और आंतरिक शांति का अमूल्य अनुभव प्राप्त हुआ। डा. गोयल ने कहा कि मुझे यह भी सौभाग्य मिला कि साधना के साथ-साथ सेवा कार्य निरंतर चलते रहे। लंगर भंडारा, छबील, पौधारोपण, खाद्य सामग्री वितरण तथा अन्य जनसेवा के कार्यों ने इस साधना को और अधिक सार्थक बना दिया। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि सेवा और साधना एक-दूसरे की पूरक हैं। मैं परमात्मा, अपने गुरुजनों, परिवारजनों, मित्रों, शुभचिंतकों तथा उन सभी साथियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हंू जिनकी शुभकामनाओं, प्रार्थनाओं और स्नेह ने मुझे इस साधना को सफलतापूर्वक पूर्ण करने की शक्ति प्रदान की। मेरी प्रार्थना है कि परमात्मा हम सभी को आत्मचिंतन, सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करें। मौन से मुझे यह सीख मिली है कि सबसे गहरी आवाज वही होती है, जो शब्दों के बिना सुनाई देती है।

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