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हनुमान का भावार्थ है अपने मान व अहंकार का हनन करना: स्वामी विज्ञानानंद

सिरसा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्थानीय पुलिस लाइन मंदिर में तीन दिवसीय सुंदर काण्ड कथा के दूसरे द्वितीय दिवस संस्थान की ओर से दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के शिष्य कथा व्यास स्वामी विज्ञानानंद ने गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस में से सुन्दर काण्ड प्रसंग को प्रस्तुत करते हुए कहा कि सुन्दर काण्ड प्रसंग में गोस्वामी तुलसीदास ने भक्त हनुमान की गाथा का वर्णन किया है। हनुमान का भावार्थ है अपने मान का, अहंकार का हनन करना। हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त और सेवक थे, जिन्होंने अपनी भक्ति और शक्ति से भगवान राम की अविचल सेवा की। यदि उनकी भक्ति और शक्ति की बात की जाए तो हनुमान जी की भक्ति के कुछ महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिसमें श्रद्धा और विश्वास,, निष्ठा और संयम, शक्ति और साहस, सेवा और समर्पण जैसे दिव्य सद्गुण दर्शनीय हैं। हनुमान जी की भक्ति हमें जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और हमें अपने जीवन में सीता रूपी भक्ति को लक्ष्य स्वरूप प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है, जिनके जीवन में हनुमान जी सदृश संत सद्गुरु आते हैं, वह उन्हें ईश्वर से मिला देते हैं। सुग्रीव, विभिषण और सीता जी को हनुमान जी ने ही ईश्वर से मिलाया। भक्तों के दु:ख हरने वाले संकट मोचन वीर हनुमान एक जीवात्मा और परमात्मा के मध्य संत की भूमिका निभाते हैं। इस प्रसंग में हनुमान जी की एक यात्रा का वर्णन आता है, जिसमें उन्होंने मां सीता की खोज की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने अनेक बाधाओं का सामना किया, लेकिन प्रभु की कृपा से वे प्रत्येक बाधा को पार कर जाते हैं। मैनाक पर्वत नामक बाधा ने उन्हें विश्राम करने के लिए कहा, लेकिन हनुमंत जी ने कहा कि मैं प्रभु श्री राम का कार्य किए बिना विश्राम नहीं कर सकता। इसी प्रकार हमें भी ईश्वर ने महान कार्य करने के लिए इस धरा पर भेजा है और वह है प्रभु की भक्ति। जब तक हमारा यह लक्ष्य पूर्ण न हो हमें भी विश्राम भाव आलस्य का त्याग करना चाहिए। हमारा यह लक्ष्य तभी पूर्ण होगा, जब हमारे जीवन में वीर हनुमान जैसे संत आएंगे। तब हम भी विभीषण जी की तरह प्रभु राम के वास्तविक स्वरूप प्रकाश का भीतर दर्शन कर पाएंगे। कार्यक्रम में साध्वी विष्णु अर्चना भारती, संतोष भारती, नेहा भारती व पूषा भारती सुमधुर भजनों का गायन किया। कार्यक्रम में आज ऑफिसर राजेश लुक्खा, जुगती राम व राजेश दुआ को सहर्ष उपस्थिति रही। कथा का समापन प्रभु की पावन आरती से हुआ।

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