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प्रसन्नता को महसूस करेंगे तो हमारे भीतर भी अच्छी भावनाएं आएगी

आज महासाध्वी श्री डा.चन्दना जी म. ने भक्तामर की महिमा का वर्णन करते हुए बताया – भक्क्तामर स्तोत्र एक प्रसिद्ध स्तोत्र है। किसी भी कार्य को प्रारंभ करने से पहले आचार्य मानतुंग ने बताया- तीर्थकर का जन्मोत्व मनाने इन्द्र आते है वो आपकी भक्ति करते है, जहां इंद्र स्वयं रहते है यानि पहले देवलोक में बहुत बड़ी पुस्तकायल होता है। भूत भविष्य के ना जाने कितनी ही पुस्तकें है पुस्तकालय को वाड़मय कहा जाता है तीर्य कर का जन्म स्वय इन्द्र महाराज नृत्य करते है और 1008 भा के नामों से उनका वर्णन करते है। आचार्य मानतुग कहते है जैसे देवलोक के इंद्र भगवान आपकी स्तुति करते है वैसे मैं करने में सामर्थ ना हूं फिर भी जितनी मेरी बुद्धि, भक्ति से हुआ मैने आपकी स्तुति करने का प्रयास किया। भक्ति से भ. को विभोर किया जाता है। वैसे तो 48 गाथा की क्तुति करनी चाहिए लेकिन इन पहली दो पक्तियों की स्तुति अर्थ सहित करने का प्रयास जरूर करनी चाहिए। हमें भी आचार्य मानतुंग की तरह स्मृति करने का प्रयास करना चाहिए। प्रभु के आभा मंडल को उनकी सौम्यता को देखकर भावविभोर होने का प्रयास करना चाहिए।जब उनके गुणों को उनकी प्रसन्नता को महसूस करेंगे तो हमारे भीतर भी अच्छी भावनाएं आएगी। तुम्हारे और भ. के बीच का ये प्रेम है तुम दोनों के बीच की प्रेम कहानी है। चमत्कार होगे पर अंदर होगें बिना किसी काममा निष्काम से भक्ति करने से होगा। इस गाथा का महत्व सकल रोग नाशक सब प्रकार के रोगों को दूर करने के लिए की जाती है। आज की गाया का लाभ, बहिन बबली जी धर्मपत्नी नरेश जी गर्ग सपुत्र श्री साधु राम गर्ग परिवार ने लिया।अध्यक्ष सन्दीप जैन ज्ञान चंद जैन,  पुर्ण चंद जैन,अंकुर गुप्ता,  जोरा जैन ओम प्रकाश सैनी, नरेश ज़ी गर्ग, साईं ज़ी सेतिया, जगदीश राय जैन लवली कुमार, ईस कुमार प्रेम जैन सुखदेव क्षोरड महिला मण्डल सरोज जैन रिटा जैन, संजू जैन, सरोज जैन, बबली जैन, अंजू जैन।

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